क्या आपने किसी को गुरु माना है अपने हृदय में किसी सतगुरु की मूरत को बसाया है, किसी (सदगुरु) कोअनमने मन से बिठाया है या पूरी भावना से गुरु को हृदय में स्थान दिया है।
गुरु से भी रिश्ता बनाकर रखें आपका अनंत सौभाग्य है जो आपको गुरु मिले। परंतु हम पैसे की माया में, घर परिवार की चकाचौंध में गुरु को भूल जाते हैं, हजारों काम याद रहते हैं परंतु जिस गुरु को मन मंदिर में स्थापित किया है उसको भूल जाते हैं। साल - साल दर्शन नहीं कर पाते (वैसे तो हर महीना गुरु के दर्शन करने चाहिए) अगर किसी कारण हर महीने दर्शन नहीं करते तो कम से कम साल में एक बार तो जाकर के गुरु के चरणों में मस्तक झुकाना चाहिए। कुछ लोग कहते हैं कि हम तो गुरु को दिल से याद ही कर लेते हैं, कुछ काम दिल से होते हैं कुछ काम व्यक्तिगत उपस्थिति से ही पूर्ण होते हैं, इसलिए आप सभी को यह विशेष कहना है कि कम से कम वर्ष में एक बार तो गुरु चरणों में जरूर आएं अगर आप नहीं आते तो गुरु धारना का कोई मतलब नहीं रह जाता।