बस जीवन भी शायद ऐसा ही है --
"यदि मन में किसी के लिए वैमनस्यता, ईर्ष्या और नफ़रत की गांठ होगी! तो हमारा जीवन भी बिना रस का बन जाएगा........
और जीवन को रसमय बनाने के लिए नफरत आदि की गांठों को अपने मन से निकालना ही होगा....... सम्भवतः तभी जीवन में प्यार, अपनत्व और स्नेह का रस सम्बन्धों एवम रिश्तों को मधुर बनाएगा।
हमको अहम को त्यागकर हमारा समर्पण करना होगा, किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है, मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूढना जो आपके समर्पण की क़द्र करे ....।